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Gonda News: कहीं रोली चंदन से हुआ अभिनंदन, कहीं सूनी रही कक्षाएं

संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Tue, 16 Jun 2026 11:04 PM IST
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The children were welcomed with a roli mark.
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गोंडा। ग्रीष्मावकाश के बाद जिले के 2609 परिषदीय विद्यालय मंगलवार से पठन पाठन के लिए खुल गए। तपिश भरी गर्मी के कारण पहले दिन बच्चों में स्कूल जाने का उत्साह काफी कम नजर आया। अधिकांश विद्यालयों में ताले तो खुले लेकिन पढ़ाई की शुरूआत नहीं हुई। वहीं कुछ स्कूलों में रोली चंदन के साथ छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया गया तथा उन्हें मीठा व्यंजन खिलाकर मुंह मीठा कराया गया।

उच्च प्राथमिक विद्यालय बेलवा नोहर के शिक्षक मनोज कुमार चतुर्वेदी व कंपोजिट विद्यालय विशुनपुर कला की शिक्षिका रजनी मिश्रा ने सुबह: 07:30 बजे स्कूल पहुंचे बच्चों का स्वागत रोली चंदन लगाकर पुष्प माला पहनाने के साथ किया। इसके साथ ही मध्याह्न भोजन में बच्चों को हलुआ पूड़ी खिलाई गई। कंपोजिट विद्यालय उमड़ी कोड़री में प्रधानाचार्य रमेशचंद्र श्रीवास्तव ने बच्चों का फूल मालाओं से स्वागत किया तथा लड्डू बांटे। राम गोपाल सिंह, कालिंदी सिंह, अंजली सिंह आदि ने शिक्षण कार्य किया।
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छुट्टी से पहले ही चले गए छात्र

शहर का मॉडल विद्यालय रानीपुरवा में शिक्षक व रसोइया मौजूद मिले, लेकिन कोई छात्र-छात्रा दिखाई नहीं पड़ा। सहायक अध्यापक अनिल पांडेय ने बताया कि पहले दिन सात बच्चे आए थे। इस लिए समय से पहले छुट्टी हो जाने के कारण वह जल्द ही चले गए। सहायक अध्यापक ने बताया कि विद्यालय में साफ सफाई की गई। सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक विद्यालय का समय है। शिक्षक सूर्य प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि 72 बच्चों का नामांकन है। बुधवार से उपस्थिति बढ़ने की संभावना है।
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शिक्षक न छात्र, सिर्फ रसोइया मिली
-प्राथमिक विद्यालय राधाकुंड में सुबह 11:35 बजे करीब न तो कोई छात्र दिखाई पड़ा और न ही शिक्षक। सिर्फ रसोइया सुमन और गीता मौजूद रहीं। सुमन ने बताया कि शिक्षक मोनिका गुप्ता आई थी, लेकिन कोई छात्र नहीं आया तो थोड़ी दूर बाद चली गई। हम लोग स्कूल बंद करने के बाद जाएंगे। बच्चे नहीं आए तो मध्याह्न भोजन नहीं भी नहीं बना।
निरीक्षण कर परखी जाएगी हकीकत
बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया कि सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि समय से विद्यालय में पहुंचें। साथ ही गांव में घर-घर जाकर छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने के लिए प्रेरित भी करें। जल्द ही रोस्टर आधारित निरीक्षण कार्यक्रम तैयार कर स्कूलों में शिक्षण कार्य की हकीकत परखी जाएगी।
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