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Gonda News: हादसों ने बुझा दिए तीन घरों के चिराग
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:03 PM IST
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युवक की मौत से शोकाकुल परिजन।
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नवाबगंज। सोमवार शाम हुए दो सड़क हादसों ने तीन घरों के चिराग बुझा दिए। इन हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई, जिससे दो परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। मंगलवार को शव गांव पहुंचने पर हर तरफ चीख-पुकार मच गई। मंगलवार देर शाम तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार गमगीन माहौल में किया गया।
सिरसा गांव निवासी शिवकुमार (30) की मौत से उनका परिवार टूट गया है। वह दुबई में मजदूरी कर परिवार का सहारा थे और 14 दिन पहले ही घर लौटे थे। सोमवार शाम बाजार जाते समय एक हादसे में उनकी जान चली गई। मंगलवार को शव घर पहुंचने पर उनकी पत्नी पुष्पा देवी बेसुध हो गईं। मां और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था, गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। इसी हादसे में किशुनदासपुर निवासी दुर्गेश यादव, उनकी पत्नी कौशल्या और एक वर्षीय पुत्र आयुष घायल हुए थे। इलाज के दौरान मासूम आयुष की भी मौत हो गई। जिस बच्चे की किलकारियां घर में गूंजती थीं, उसकी अर्थी उठते ही पूरा गांव गम में डूब गया। मां कौशल्या अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं।
राजू भारती की मौत से पसरा मातम
दूसरे हादसे में परसापुर गांव के कैथल पुरवा निवासी राजू भारती (35) की मौत हुई। वह हिमाचल प्रदेश में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। राजू 31 मई को घर आए थे और सोमवार शाम पत्नी से मिलने ससुराल जा रहे थे। अज्ञात वाहन की टक्कर से उनकी जान चली गई। मंगलवार को राजू का शव गांव पहुंचा तो पत्नी पुष्पा, मां कलावती और अन्य परिजन फूट-फूटकर रो पड़े। उनके सात वर्षीय पारुल, चार वर्षीय जाह्नवी और तीन वर्षीय गोपिन बार-बार अपने पिता को उठाने की कोशिश करते रहे। बच्चों की मासूम पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
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सिरसा गांव निवासी शिवकुमार (30) की मौत से उनका परिवार टूट गया है। वह दुबई में मजदूरी कर परिवार का सहारा थे और 14 दिन पहले ही घर लौटे थे। सोमवार शाम बाजार जाते समय एक हादसे में उनकी जान चली गई। मंगलवार को शव घर पहुंचने पर उनकी पत्नी पुष्पा देवी बेसुध हो गईं। मां और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था, गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। इसी हादसे में किशुनदासपुर निवासी दुर्गेश यादव, उनकी पत्नी कौशल्या और एक वर्षीय पुत्र आयुष घायल हुए थे। इलाज के दौरान मासूम आयुष की भी मौत हो गई। जिस बच्चे की किलकारियां घर में गूंजती थीं, उसकी अर्थी उठते ही पूरा गांव गम में डूब गया। मां कौशल्या अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं।
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राजू भारती की मौत से पसरा मातम
दूसरे हादसे में परसापुर गांव के कैथल पुरवा निवासी राजू भारती (35) की मौत हुई। वह हिमाचल प्रदेश में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। राजू 31 मई को घर आए थे और सोमवार शाम पत्नी से मिलने ससुराल जा रहे थे। अज्ञात वाहन की टक्कर से उनकी जान चली गई। मंगलवार को राजू का शव गांव पहुंचा तो पत्नी पुष्पा, मां कलावती और अन्य परिजन फूट-फूटकर रो पड़े। उनके सात वर्षीय पारुल, चार वर्षीय जाह्नवी और तीन वर्षीय गोपिन बार-बार अपने पिता को उठाने की कोशिश करते रहे। बच्चों की मासूम पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।