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ZOO में हाइड्रोसाइनाइड ने निगली 17 हिरनों की जान

आशुतोष मिश्र/लखनऊ Updated Sat, 14 Sep 2013 08:28 PM IST
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पिछले करीब एक हफ्ते से लखनऊ के चिड़ियाघ्ार में काले हिरनों की मौत का सिलसिला शनिवार शाम तक जारी रहा। अब पता चला कि मौत की वजह क्या है।
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शनिवार शाम चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि जांच में हिरन के बाड़े में हाइड्रोसाइनाइड की पुष्टि हुई है। इसी वजह से एक के बाद एक 17 काले हिरनों ने दम तोड़ दिया।

गौरतलब है कि तमाम कवायद के बावजूद चिड़ियाघर में शनिवार शाम एक काले हिरन ने दम तोड़ दिया।

इसके पहले शुक्रवार को भी दो हिरनों ने जान गवां दी थी। अब मारे गए काले हिरनों की संख्या 17 हो गई है। यह हालत तब है जबकि पूरे चिड़ियाघर को सैनिटाइज किया जा चुका है।
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गौरतलब है कि जांच टीम ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए स्थानीय अधिकारियों से 38 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। साथ ही उनसे पिछले एक हफ्ते की वीडियो फुटेज भी मांगी गई है।

गौरतलब है कि गुरुवार दोपहर बाद बीमार चल रहे एक वयस्क एक नर हिरन ने दम तोड़ दिया था।

निराशाजनक बात यह है कि बाहर से आए वेटेनरी विशेषज्ञों की टीम भी ‘इंफेक्शन’ से जूझ रहे हिरनों की मौत का कारण नहीं खोज पा रही है। टीम ने लखनऊ जू के बचे हुए काले हिरनों को बचाने के लिए उनके बाड़े को थ्री-टियर सेनीटाइज करना शुरू कर दिया।

बाड़े में जिंदा बचे हिरनों में आधा दर्जन से अधिक हिरनों को दिन भर में उनके रिफ्लेक्सेस (धीमे मूवमेंट) के आधार पर ‘आईसीयू’ में शिफ्ट कराया गया है।

उधर, दोपहर बाद जू पहुंची जांच समिति ने तमाम अधिकारियों व कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की और जू के तमाम इलाकों का दौरा किया। जांच टीम ने स्टोर और हिरन के बाड़ों की सुविधाओं की भी जांच की।

विशेषज्ञों ने बाड़े को कब्जे में लिया
देर रात से ही ढुलमुल दिख रहे एक वयस्क नर को टीम ने भोर के पहले ही इलाज के लिए अपने कब्जे में ले लिया। बाड़े में ही बने अस्थाई हास्पिटल में उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

दोपहर बाद लगभग 8-10 वर्ष उम्र के इस नर ने दम तोड़ दिया। ‘ऑपरेशन ब्लैक बक’ में लगी वेटेनरी विशेषज्ञों की रेस्क्यू टीम के तमाम सदस्य देर रात एक बजे के बाद से ही ‘साइलेंट इंफेक्शन’ से जूझ रहे हर हिरन के मूवमेंट पर बारीकी से नजर रखे थे।

सुबह 10 बजे के बाद उन्होंने पूरे बाड़े में ऐसे 6 से 8 नर-मादा हिरण स्पॉट किए, जिनके रिफ्लेक्सेस मूवमेंट धीमे पड़ चुके थे। टीम ने उन्हें अलग कर बाड़े में ही बनाए गए विशेष सघन चिकित्सा कक्ष में इलाज शुरू किया।

हालांकि शाम तक इनकी सही संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकी थी। डॉक्टरों ने हिरनों को एंटी बायटिक के अलावा कई दवाएं दीं।

जांच टीम ने मांगे ब्लैक बक के डेथ सर्टिफिकेट
सीएम के निर्देश पर बनी जांच टीम बृहस्पतिवार दोपहर फिर जांच के लिए जू पहुंची। टीम के सदस्य प्रमुख वन संरक्षक प्रशिक्षण-अनुसंधान कानपुर अश्वनी कुमार ने जू प्रशासन से मारे गए सभी ब्लैक बक के डेथ सर्टिफिकेट रिपोर्ट मांगी है। टीम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया।

टीम ने जू निदेशक, दोनों चिकित्सकों तमाम स्टाफ के साथ काले हिरनों की मृत्यु केकारण, जू प्रशासन की लापरवाही, जांच और घटना के रोकथाम के उठाए गए कदमों पर पूछताछ की।

सूत्रों की माने तो टीम की जांच में बाड़े में घटना वाले दिन से पहले के दिनों में बाहरी छेड़छाड़ का बिंदु भी शामिल है। डिप्टी डायरेक्टर ऑफिस में करीब दो घंटे तक चली पूछताछ के दौरान टीम ने जू स्टोर, हॉस्पिटल, और पोस्टमार्टम स्पाट का भी मुआयना किया।

बाड़ों का हुआ थ्री टियर-सेनीटाइजेशन
काले हिरनों में रह रहकर उभर रहे ‘इंफेक्शन’ को देखते हुए टीम और जू प्रशासन ने पूरे बाड़े को थ्री टियर-सेनीटाइज किया है। सुबह से ही बाड़ों की एक इंच से अधिक की मिट्टी साफ करवाकर पूरे बाड़े में दवाओं के साथ चूने व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हुआ है।

इसके अलावा पानी और चारों ओर लगे पर्दों पर भी जीवाणुनाशकों का छिड़काव किया गया।

डियर ब्रीड को दिए एंटी-बायटिक्स
काले हिरनों का संक्रमण अन्य नजदीकी बाड़ों के वन्यजीवों तक न पहुंचे इसके लिए भी पूरी तैयारी की गई है। वन्यजीवों को संक्रमण से बचाने के लिए उनकी खुराक में एंटी बायोटिक डोज दी जा रही है। इसी के साथ हाग डियर, बाराहसिंघा के बाड़े को भी सेनीटाइज्ड किए जाने की तैयारी है।

‘हीमोरेडिक्स सेप्टीसेमिया’ के दिख रहे लक्ष्ण
देहरादून से आए विशेषज्ञ डॉ. पराग के मुताबिक हिरन जैसा रिएक्ट कर रहे हैं, वह खतरनाक ‘हीमोरेडिक्स सेप्टीसेमिया’ इंफेक्शन की ओर इशारा कर रहे हैं। ये इंफेक्शन सबसे पहले श्वसन तंत्र पर ही हमला करते हैं।
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