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Ambala News: नागरिक अस्पताल में बिना डोनर नहीं मिल रहा रक्त
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छावनी के नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर। संवाद
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- गर्मी में सामाजिक संस्थाओं के रक्तदान शिविर लगाने में आई कमी, मरीज और तीमारदार परेशान
60 यूनिट पर सिमटा स्टॉक
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी और सिटी के नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड बैंक इन दिनों रक्त की कमी से जूझ रहे हैं। ब्लड बैंक में खून का स्टॉक कम होने के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि ब्लड सेंटर में खून लेने पहुंच रहे लोगों को डोनर का इंतजाम करने को कहा जा रहा है और उसके बाद ही मरीजों को खून मुहैया कराया जा रहा है।
नागरिक अस्पताल के ब्लड सेंटर से पहले प्रतिदिन औसतन 18 मरीजों को खून दिया जाता था। खून की कमी और मुश्किलों के बीच अब यह संख्या घटकर रोजाना करीब 12 मरीजों पर आ गई है। ब्लड सेंटर प्रशासन मुश्किल से आपातकालीन स्थिति वाले मरीजों को खून उपलब्ध करवा पा रहा है। वर्तमान में ब्लड सेंटर में महज 60 यूनिट के करीब खून का स्टॉक बचा है, जो अस्पताल की दैनिक जरूरतों के लिहाज से कम है।
संस्थाएं लगा नहीं रहीं शिविर
इन दिनों में अक्सर ब्लड बैंक रक्त की कमी से जूझते दिखाई देते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि ब्लड बैंक के पास अक्सर सामाजिक संस्थाओं के रक्तदान शिविर से रक्त आता है। गर्मी में संस्थाएं कम शिविर लगाती हैं। वहीं जो संस्थाएं शिविर लगा भी रही हैं तो वह रक्तदान के लिए पीजीआई चंडीगढ़ से टीम बुला रही हैं। ऐसे में स्थानीय ब्लड बैंक को कुछ नहीं मिलता। पूरा रक्त पीजीआई को चला जा रहा है। सिर्फ सरकारी ही नहीं बल्कि प्राइवेट ब्लड बैंक संचालक भी इस स्थिति से परेशान हैं।
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खुद बीमार कहां से लाएं डोनर
तोपखाना निवासी राजिंद्र ने बताया कि उनकी 21 वर्षीय बेटी काजल की तबीयत खराब होने पर वह मंगलवार को उसे अस्पताल लाए थे। डॉक्टरों ने शरीर में खून की भारी कमी बताई। मंगलवार को तो उन्हें ब्लड सेंटर से रक्त मिल गया लेकिन बुधवार को दोबारा खून की जरूरत पड़ने पर उनसे डोनर लाने को कहा गया जबकि वह खुद अग्न्याशय की बीमारी से पीड़ित हैं, ऐसे में वह खुद डोनर ढूंढने के लिए बेबस नजर आए।
डोनर का इंतजाम करने की मजबूरी
दुखेड़ी की टीना ने बताया कि सोमवार को तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था। सोमवार और मंगलवार दोनों दिन परिवार ने जैसे-तैसे डोनर का प्रबंध कर उन्हें खून चढ़वाया। बुधवार को भी उन्हें खून की जरूरत थी, जिसके लिए परिजन डोनर की तलाश करते रहे। इसी तरह पूनम नाम की महिला के भाई राजकुमार को भी ब्लड सेंटर से खून लेने के लिए डोनर का इंतजाम करना पड़ा, जिसके बाद उनकी बहन को रक्त मिल सका।
बेटे ने दिया खून, अब बेटी डोनर की तलाश में
नारायणगढ़ के गांव मिल्क निवासी सोनिया को मंगलवार को तबीयत बिगड़ने पर नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों द्वारा खून चढ़ाने की बात कहने पर जब परिजन ब्लड बैंक पहुंचे, तो उन्हें डोनर लाने को कहा गया। इसके बाद सोनिया के बेटे ने खुद रक्तदान किया, तब जाकर मां को खून चढ़ाया जा सका। बुधवार को भी सोनिया को रक्त की आवश्यकता थी, जिसके लिए उनकी बेटी डोनर का इंतजाम करने में लगी रही।
60 यूनिट पर सिमटा स्टॉक
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी और सिटी के नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड बैंक इन दिनों रक्त की कमी से जूझ रहे हैं। ब्लड बैंक में खून का स्टॉक कम होने के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि ब्लड सेंटर में खून लेने पहुंच रहे लोगों को डोनर का इंतजाम करने को कहा जा रहा है और उसके बाद ही मरीजों को खून मुहैया कराया जा रहा है।
नागरिक अस्पताल के ब्लड सेंटर से पहले प्रतिदिन औसतन 18 मरीजों को खून दिया जाता था। खून की कमी और मुश्किलों के बीच अब यह संख्या घटकर रोजाना करीब 12 मरीजों पर आ गई है। ब्लड सेंटर प्रशासन मुश्किल से आपातकालीन स्थिति वाले मरीजों को खून उपलब्ध करवा पा रहा है। वर्तमान में ब्लड सेंटर में महज 60 यूनिट के करीब खून का स्टॉक बचा है, जो अस्पताल की दैनिक जरूरतों के लिहाज से कम है।
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संस्थाएं लगा नहीं रहीं शिविर
इन दिनों में अक्सर ब्लड बैंक रक्त की कमी से जूझते दिखाई देते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि ब्लड बैंक के पास अक्सर सामाजिक संस्थाओं के रक्तदान शिविर से रक्त आता है। गर्मी में संस्थाएं कम शिविर लगाती हैं। वहीं जो संस्थाएं शिविर लगा भी रही हैं तो वह रक्तदान के लिए पीजीआई चंडीगढ़ से टीम बुला रही हैं। ऐसे में स्थानीय ब्लड बैंक को कुछ नहीं मिलता। पूरा रक्त पीजीआई को चला जा रहा है। सिर्फ सरकारी ही नहीं बल्कि प्राइवेट ब्लड बैंक संचालक भी इस स्थिति से परेशान हैं।
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खुद बीमार कहां से लाएं डोनर
तोपखाना निवासी राजिंद्र ने बताया कि उनकी 21 वर्षीय बेटी काजल की तबीयत खराब होने पर वह मंगलवार को उसे अस्पताल लाए थे। डॉक्टरों ने शरीर में खून की भारी कमी बताई। मंगलवार को तो उन्हें ब्लड सेंटर से रक्त मिल गया लेकिन बुधवार को दोबारा खून की जरूरत पड़ने पर उनसे डोनर लाने को कहा गया जबकि वह खुद अग्न्याशय की बीमारी से पीड़ित हैं, ऐसे में वह खुद डोनर ढूंढने के लिए बेबस नजर आए।
डोनर का इंतजाम करने की मजबूरी
दुखेड़ी की टीना ने बताया कि सोमवार को तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था। सोमवार और मंगलवार दोनों दिन परिवार ने जैसे-तैसे डोनर का प्रबंध कर उन्हें खून चढ़वाया। बुधवार को भी उन्हें खून की जरूरत थी, जिसके लिए परिजन डोनर की तलाश करते रहे। इसी तरह पूनम नाम की महिला के भाई राजकुमार को भी ब्लड सेंटर से खून लेने के लिए डोनर का इंतजाम करना पड़ा, जिसके बाद उनकी बहन को रक्त मिल सका।
बेटे ने दिया खून, अब बेटी डोनर की तलाश में
नारायणगढ़ के गांव मिल्क निवासी सोनिया को मंगलवार को तबीयत बिगड़ने पर नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों द्वारा खून चढ़ाने की बात कहने पर जब परिजन ब्लड बैंक पहुंचे, तो उन्हें डोनर लाने को कहा गया। इसके बाद सोनिया के बेटे ने खुद रक्तदान किया, तब जाकर मां को खून चढ़ाया जा सका। बुधवार को भी सोनिया को रक्त की आवश्यकता थी, जिसके लिए उनकी बेटी डोनर का इंतजाम करने में लगी रही।

छावनी के नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर। संवाद

छावनी के नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर। संवाद

छावनी के नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर। संवाद