डायरिया यानी दस्त की समस्या छोटे बच्चों में काफी आम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक ये दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मौत का एक बड़ा कारण है। हर साल लगभग 3.70 लाख से 4.46 लाख बच्चों की जान डायरिया की वजह से चली जाती है। गंभीर दस्त के दौरान शरीर से अत्यधिक तरल पदार्थ निकल जाने की वजह से होने वाला गंभीर डिहाइड्रेशन और कुपोषण इसका बड़ा कारण है। अच्छी बात यह है कि कुछ बुनियादी उपायों से इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
NFHS-6: बच्चों की मौत की बड़ी वजह पर लगा कंट्रोल, सरकार ने साझा किए ताजा आंकड़े
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त की घटनाएं एनएफएचएस-5 में 0.7 प्रतिशत से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गईं। गंभीर दस्त विश्व स्तर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण रहा है।
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गंभीर दस्त के मामलों और मृत्युदर में कमी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त की घटनाएं एनएफएचएस-5 में 0.7 प्रतिशत से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गईं। वहीं, 12-23 माह के बच्चों में रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक का कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया।
गौरतलब है कि रोटावायरस शिशुओं और छोटे बच्चों में गंभीर दस्त और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के प्रमुख कारणों में से एक है। वैक्सीनेशन की मदद से इसके संक्रमण को कम किया जा सकता है।
- मंत्रालय ने आगे बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी 38 प्रतिशत की कमी आई है।
- यह 2014 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 45 से घटकर 2024 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 28 हो गई है।
स्वस्थ आदतों का मिल रहा परिणाम
मंत्रालय ने इस सुधार का श्रेय नेशनल हेल्थ मिशन के तहत किए गए प्रयासों को दिया, जिसमें यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम और स्टॉप डायरिया कैंपेन भी शामिल हैं। इस अभियान के तहत, आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करती हैं।
दस्त के मामलों में कमी लाने को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और जिंक सप्लीमेंट के उपयोग, स्तनपान, साबुन से हाथ धोने, पोषण जागरूकता और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज कराने की आदत को बढ़ावा दिया है।
स्वच्छ पीने के पानी ने दूर किया खतरा
मंत्रालय ने कहा, जागरूकता बढ़ाने को लेकर किए जाए रहे इन लगातार प्रयासों ने दस्त की रोकथाम को सामुदायिक स्तर पर मजबूत किया है, खासकर ग्रामीण और उन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं कम उपलब्ध हैं।
- मंत्रालय ने ग्रामीण भारत में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच बेहतर बनाने में 'जल जीवन मिशन' की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
- आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में नल के पानी की सुविधा (टैप कनेक्शन) की पहुंच 2019 के 17 प्रतिशत से बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई है।
- इससे 15.85 करोड़ घरों और 5.91 लाख से अधिक गांवों को लाभ पहुंचा है।
- मंत्रालय ने कहा कि टीकाकरण, दस्त प्रबंधन, स्वच्छता को बढ़ावा, पोषण, साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल को मिलाकर बनाया गया एकीकृत दृष्टिकोण भारत को बाल स्वास्थ्य से जुड़े सतत विकास लक्ष्य के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर रहा है।
बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, साफ-सफाई और सुरक्षित खानपान की मदद से डायरिया से बचाव किया जा सकता है।
- हाथ धोने की आदत बच्चों में डायरिया के खतरे को काफी कम कर सकती है।
- खाना खाने से पहले, टॉयलेट के बाद और बच्चे को खाना खिलाने से पहले साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है।
- साफ और उबला हुआ पानी बच्चों को देना चाहिए।
- खुले में रखा खाना, कटा हुआ फल और गंदे बर्तनों में रखा भोजन संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
- रोटावायरस वैक्सीन को बच्चों में गंभीर डायरिया से बचाव के लिए काफी प्रभावी माना जाता है। भारत के यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम में भी यह वैक्सीन लगाई जाती है।
- इससे गंभीर दस्त के जोखिमों और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को रोका जा सकता है।
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स्रोत:
union Health Ministry Releases National Family Health Survey – 6
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