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Almora News: ध्यानार्थ..... मोहान की आईएमपीसीएल दवा फैक्टरी निजी हाथों में, कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 27 May 2026 10:51 PM IST
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मौलेखाल(अल्मोड़ा)। मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) दवा फैक्टरी को 121 करोड़ रुपये से अधिक में निजी कंपनी स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से रणनीतिक बिक्री को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता और नाराजगी है।
आईएमपीसीएल आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के निर्माण में विशेषज्ञता रखने वाली देश की प्रमुख सरकारी दवा फैक्टरी रही है। वर्ष 2017 से शुरू हुई विनिवेश प्रक्रिया के तहत अब फैक्टरी पूरी तरह निजी हाथों में चली गई है। मंत्रालय के अनुसार स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स ने सबसे ऊंची बोली लगाकर 1,210,094,400 में खरीद लिया है।
फैक्टरी के निजीकरण के बाद सबसे बड़ा संकट यहां कार्यरत कर्मचारियों के सामने खड़ा हो सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनी आवश्यकता के अनुसार कभी भी अस्थायी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका है।
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आईएमपीसीएल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। रामनगर, मोहान, कुमेरिया और सल्ट और आसपास क्षेत्र के कई ग्रामीण वर्षों से इस फैक्टरी में कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में फैक्टरी के निजीकरण को लेकर क्षेत्र में लगातार विरोध होता रहा।
फैक्टरी को निजी हाथों में देने के विरोध में कर्मचारियों ने महीनों तक धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी फैक्टरी को बचाने के प्रयास किए थे। वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी संसद में आईएमपीसीएल का मुद्दा उठाते हुए कंपनी और कर्मचारियों से जुड़े सवाल सरकार के सामने रखे थे। इसके बावजूद अब दवा फैक्टरी की बिक्री को अंतिम मंजूरी मिल गई है।
आईएमपीसीएल कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत ने कहा कि दवा फैक्टरी को मात्र करीब 121 करोड़ रुपये में बेच दिया गया जबकि सभी ऋण और देनदारियां घटाने के बाद भी कंपनी की वास्तविक संपत्ति लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपये आंकी जा रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी के पास करीब 50 करोड़ रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) मौजूद है जबकि लगभग 40 करोड़ रुपये की जीएसटी राशि भी वापस आनी बाकी है। इस प्रकार उनके अनुसार निजी खरीदार कंपनी को सीधे तौर पर करीब 90 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया गया है। जयपाल सिंह रावत ने आरोप लगाया कि शेष लगभग 31 करोड़ रुपये के मूल्य पर पूरी फैक्टरी का सौदा कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों और क्षेत्रीय लोगों में भारी नाराजगी है।
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सैकड़ों कर्मचारियों के बेरोजगार होने का खतरा
आईएमपीसीएल दवा फैक्टरी में कार्यरत करीब 50 से 60 स्थायी कर्मचारियों को निजी कंपनी की ओर से एक वर्ष तक सेवा से नहीं हटाया जा सकेगा। हालांकि एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद कंपनी आवश्यकता और अपनी नीतियों के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगी। वहीं फैक्टरी में कार्यरत लगभग साढ़े चार सौ अस्थायी कर्मचारियों की स्थिति अधिक असुरक्षित मानी जा रही है। निजी कंपनी को आवश्यकता पड़ने पर उन्हें किसी भी समय सेवा से बाहर करने का अधिकार होगा।
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क्या बोले कर्मचारी
- हमारी लाख कोशिशों के बावजूद साल दर साल करोड़ों का फायदा कमा रही फैक्टरी को निजी कंपनी को बेच दिया गया है। हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हम कर्मचारियों के हित के लिए धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे। इस फैसले के खिलाफ कोर्ट तक जाएंगे। - जयपाल सिंह रावत, अध्यक्ष कर्मचारी संगठन, आईएमपीसीएल, मोहान
निजीकरण होने से सैकड़ों अस्थायी कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। निजीकरण के विरोध में आज हमने कार्य बहिष्कार किया है।- भूपेंद्र सिंह अधिकारी, सचिव कर्मचारी संगठन
करोड़ों रुपये का हर साल लाभ देने वाली दवा फैक्टरी का निजीकरण कर सरकार ने अपने करीबियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ दिया है। - कुंदन सिंह मेहरा, कोषाध्यक्ष, कर्मचारी संगठन
यहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूर एक झटके में सड़क पर आ जायेंगे। उनके परिवार की रोजी-रोटी का क्या होगा। - भगवती प्रसाद जोशी, संरक्षक
आईएमपीसीएल आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के निर्माण में विशेषज्ञता रखने वाली देश की प्रमुख सरकारी दवा फैक्टरी रही है। वर्ष 2017 से शुरू हुई विनिवेश प्रक्रिया के तहत अब फैक्टरी पूरी तरह निजी हाथों में चली गई है। मंत्रालय के अनुसार स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स ने सबसे ऊंची बोली लगाकर 1,210,094,400 में खरीद लिया है।
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फैक्टरी के निजीकरण के बाद सबसे बड़ा संकट यहां कार्यरत कर्मचारियों के सामने खड़ा हो सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनी आवश्यकता के अनुसार कभी भी अस्थायी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका है।
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आईएमपीसीएल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। रामनगर, मोहान, कुमेरिया और सल्ट और आसपास क्षेत्र के कई ग्रामीण वर्षों से इस फैक्टरी में कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में फैक्टरी के निजीकरण को लेकर क्षेत्र में लगातार विरोध होता रहा।
फैक्टरी को निजी हाथों में देने के विरोध में कर्मचारियों ने महीनों तक धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी फैक्टरी को बचाने के प्रयास किए थे। वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी संसद में आईएमपीसीएल का मुद्दा उठाते हुए कंपनी और कर्मचारियों से जुड़े सवाल सरकार के सामने रखे थे। इसके बावजूद अब दवा फैक्टरी की बिक्री को अंतिम मंजूरी मिल गई है।
आईएमपीसीएल कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत ने कहा कि दवा फैक्टरी को मात्र करीब 121 करोड़ रुपये में बेच दिया गया जबकि सभी ऋण और देनदारियां घटाने के बाद भी कंपनी की वास्तविक संपत्ति लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपये आंकी जा रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी के पास करीब 50 करोड़ रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) मौजूद है जबकि लगभग 40 करोड़ रुपये की जीएसटी राशि भी वापस आनी बाकी है। इस प्रकार उनके अनुसार निजी खरीदार कंपनी को सीधे तौर पर करीब 90 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया गया है। जयपाल सिंह रावत ने आरोप लगाया कि शेष लगभग 31 करोड़ रुपये के मूल्य पर पूरी फैक्टरी का सौदा कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों और क्षेत्रीय लोगों में भारी नाराजगी है।
सैकड़ों कर्मचारियों के बेरोजगार होने का खतरा
आईएमपीसीएल दवा फैक्टरी में कार्यरत करीब 50 से 60 स्थायी कर्मचारियों को निजी कंपनी की ओर से एक वर्ष तक सेवा से नहीं हटाया जा सकेगा। हालांकि एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद कंपनी आवश्यकता और अपनी नीतियों के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगी। वहीं फैक्टरी में कार्यरत लगभग साढ़े चार सौ अस्थायी कर्मचारियों की स्थिति अधिक असुरक्षित मानी जा रही है। निजी कंपनी को आवश्यकता पड़ने पर उन्हें किसी भी समय सेवा से बाहर करने का अधिकार होगा।
क्या बोले कर्मचारी
- हमारी लाख कोशिशों के बावजूद साल दर साल करोड़ों का फायदा कमा रही फैक्टरी को निजी कंपनी को बेच दिया गया है। हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हम कर्मचारियों के हित के लिए धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे। इस फैसले के खिलाफ कोर्ट तक जाएंगे। - जयपाल सिंह रावत, अध्यक्ष कर्मचारी संगठन, आईएमपीसीएल, मोहान
निजीकरण होने से सैकड़ों अस्थायी कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। निजीकरण के विरोध में आज हमने कार्य बहिष्कार किया है।- भूपेंद्र सिंह अधिकारी, सचिव कर्मचारी संगठन
करोड़ों रुपये का हर साल लाभ देने वाली दवा फैक्टरी का निजीकरण कर सरकार ने अपने करीबियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ दिया है। - कुंदन सिंह मेहरा, कोषाध्यक्ष, कर्मचारी संगठन
यहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूर एक झटके में सड़क पर आ जायेंगे। उनके परिवार की रोजी-रोटी का क्या होगा। - भगवती प्रसाद जोशी, संरक्षक