मंडी। कमजोर माली हालत के चलते नगर परिषद के अदालती मामलों की पैरवी अब महंगा वकील नहीं करेगा। प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग के निदेशक ने परिषद के वित्तीय हितों के मद्देनजर महंगी दरों पर अधिवक्ता की सेवा लेने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
मंडी की संस्था आरटीआई ब्यूरो के संयोजक लवण ठाकुर ने विभाग के निदेशक को पत्र प्रेषित करके नगर परिषद के महंगी दरों पर वकील नियुक्त करने से संबंधी प्रस्ताव को पास करने का विरोध करते इसे निरस्त करने की मांग की थी। आरटीआई ब्यूरो के नगर परिषद से सूचना के अधिकार के तहत सूचनाएं एकत्र से यह उजागर हुआ कि वित्तीय संकट से गुजर रही नगर परिषद ने प्रस्ताव पारित करके महंगे वकील की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, नगर परिषद पहले ही कई वर्षों से एक अधिवक्ता की दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से सेवाएं ले रही है। इसी साल 31 जनवरी को नगर परिषद ने एक अधिवक्ता को फीस की महंगी दरों पर नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया था।
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इस प्रस्ताव के मुताबिक नये अधिवक्ता को हर केस की 5500 रुपये फीस और उन्हें प्रति नोटिस 200 रुपये भी अदा किए जाने थे। वित्तीय संकट के दौरान भी महंगा अधिवक्ता नियुक्त करने के प्रस्ताव के विरोध में ब्यूरो ने विभाग के निदेशक को पत्र प्रेषित किया था। ब्यूरो के संयोजक लवण ठाकुर ने बताया कि नगर परिषद की ओर से दुकानों के किराये और हाउस टैक्स के करीब 2000 नोटिस जारी करके अदालत में केस दायर किए जाने हैं।
इधर, विभाग की निदेशक पूर्णिमा चौहान ने नगर परिषद के इस आशय में पारित किए गए प्रस्ताव को खारिज करने की पुष्टि की है। निदेशक के अनुसार नगर परिषद के वित्तीय संकट को देखते हुए वकील नियुक्त करने संबंधी परिषद के प्रस्ताव को न्यायोचित नहीं मानते हुए इसे खारिज कर दिया है।